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Tuesday, April 8, 2014

काश मैं सौदागर होता

काश मैं सौदागर होता तो चाँद की चाँदनी
ले आता गठरी में बांध और देता सबको बाँट
लम्हा-लम्हा जिंदगी न गुजरती यूं प्यासी सी
काश कही सच होते सपनो का सागर होता
तो ले आता मैं भर नीर उसका
और उधेल देता जीवन में सबके
काश मैं सौदागर .......

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