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Tuesday, April 8, 2014

तेरा नाम

दीवारों पर लिखकर आज भी तेरा नाम मिटाया करता हूँ,
तन्हाई को अपनी हर बात बताया करता हूँ.

तेरे उन्ही प्रेम गीत को बस मैं गुनगुनाया करता हूँ ,
जब भी होता हूँ तन्हा बस में गाया करता हूँ.

अब बस साथ यही है मेरे ,वीरानी सी रातों में 
तुम्हारी ही यादो से दिल को बहलाया करता हूँ.

वो वफ़ा की कसमे जो खायी थी हम दोनों ने ,
बस याद कर उन्हें ही मैं मुस्कुराया करता हूँ

दीवारों पर लिखकर आज भी तेरा नाम मिटाया करता हूँ,...

अभिषेक

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