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Tuesday, April 8, 2014

क्या मैं तेरा नाम लिखू

तुझे रात लिखू या शाम लिखू 
आखिर क्या मैं तेरा नाम लिखू 

अपने दिल के सारे अरमान लिखू
हर बार लिखू बार बार लिखू 

सोच के फिर पड़ गया मैं विस्मय में
की हृदय की इस पुस्तक में कैसे तेरा अध्याय लिखू

शब्दों के खालीपन में भी इस जीवन की
उलझन में भी अंतिम मैं एक मक़ाम लिखू

आखिर क्या मैं तेरा नाम लिखू
तुझे शाम लिखू या रात लिखू

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