Powered By Blogger

Tuesday, February 25, 2014

अब रहने दो ...!!

मत  करो बदनाम इसको ये पावन है इसे  ही पावन रहने दो 
मत उड़ाओ कीचड़ इस पे इसे निर्मल ही बहने दो 
 ये प्रेम है नहीं कोई तुम्हारे महलों के बाग का फूल 
ये गरीब के घर में भी उगता है इसको वहा भी  उगने दो 
मत करो कैद इसको  चार दिवारी में 
ये खुले आसमान में उड़ता है इसको वही उड़ने दो 
ये बसता नहीं सिर्फ प्रेमी प्रेमिकाओ के हदय में 
ये देश में भी कला और राजनीती में भी रहता है 
अगर ये ही हो  गया ख़तम तो सोचो तुम्हारा क्या होगा
कौन तुम को पूजे का समाज के ठेकेदारो   
इसे चुप चाप अपनी ही दुनिया में युही मगन रहने दो 
मत करो सौदा इसका इसको युही बे मोल रहने दो 
ये होगा तो तुमको भी मिलेगे तुम्हारी वाहवाही करने वाले 
तो खुद के लिये ही सही इसको जैसा है वैसा ही रहने दो 
इसी ने ही बचा रखी है समाज के दिलो इंसानियत तोड़ी सी लौ 
तो घिरणा के नीर से भुझा इसको  के तमाशा देखना अब रहने दो 

No comments:

Post a Comment