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Tuesday, April 8, 2014

बहुत कुछ लिखना है ..

बहुत कुछ लिखना है ..
शब्द गुम हैं मेरे..
सर्दी की धुप में ...
दोस्ती की चुप्पी में..
दिवाली जैसे उत्सव के मेले में...
अपने कमरे के अकेलेपन में .
घर की सफाई में...
बच्चो की पढाई में...
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है.............

रात के अँधेरे पर..
सुबह की किरणों पर..
सुरमई शाम पर...
अलसाई दोपहर पर..
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है......

उसकी प्यार भरी बातों पर..
उसके गुस्से भरी आँखों पर..
खुद की परेशान जिंदगी पर..
मेरी हंसती बंदगी पर..
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है...

वो मधुमास की यादें
वो फ़ोन पर की हुई खुसफुसाहट
वो लम्बे खतो की बयानी...
बिना बोले तेरे मेरे लबो की कहानी..
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है ....

कैसे लिखूं...
जब वक़्त होता है ..
तब तेरे प्यार की चादर..
ओढ़ कर सो जाती हूँ खयालो में..
जब ख्याल होते हैं...
तो फुर्सत ही नहीं होती सजन...
पर फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है..

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