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Tuesday, April 8, 2014

वो अजनबी

बरसो बाद आज वो अजनबी अपना सा लगा ,
शुरू हुआ बातों का सिलसिला आज बड़ी देर तक चला ।
प्यार से जब उसने समझाया तो कठिन रास्ता भी आसान सा लगा ,
उसकी डाट का अंदाज़ भी आज मीठा सा लगा 
उसकी मस्ती दिल में उड़ने का अरमान जगा गयी ,
उसकी आखों की शरारत जाने क्या-क्या कह गयी 
उसका रूठना और फिर मान जाना प्यारा सा लगा ,
उसकी फ़ालतू बातों को सीरिअस लेना अच्छा लगा ।
उसकी ख़ामोशी भी ना जाने कितना कुछ कह गयी ,
और कभी बातें भी उसकी ख़ामोशी को बयान कर गयी
इतना सब जानते हुए भी वो अजनबी सा लगा ,
उसका हर एक पल एक नया राज़ खोल गया
फिर भी उस अजनबी का साथ आज अच्छा सा लगा है ।

1 comment:

  1. Hey Abhishek,
    Sorry to say but your this creation is copy of mine. You just modified it..!! :\

    http://kavyakritiofdeep.blogspot.in/2012/04/blog-post.html

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