आपने ही घर में आज किरायदार सा हूँ मैं
गुजारी है जहा जिन्दगी पूरी आज वही मेहमान सा हूँ मैं
जिनके लिये सुख के लिये त्यागा सब कुछ अपना आज उनसे ही अनजान सा हूँ मैं
मैं क्यों आज उस बुढ़ापे सा जिसकी आहट से थम जाती है साँसे अच्छे अच्छो की
जीवन के पड़ाव पे ठहरी गति शुन्य सवारी सा एक मोक्ष के इंतजार में तडपती आत्मा सा हु मैं
क्या कसूर मेरा ही है और परिणाम है ये मेरे ही कर्मो का जो खड़ा है आज मेरे ही सामने
या भोग रहा हूँ फल मैं पिछले जनम किसी जनम का जिसने आज छीन लिया है सब मेरा
और निराधार इस्तंब सा आज खड़ा वीरान सा मैं .....
गुजारी है जहा जिन्दगी पूरी आज वही मेहमान सा हूँ मैं
जिनके लिये सुख के लिये त्यागा सब कुछ अपना आज उनसे ही अनजान सा हूँ मैं
मैं क्यों आज उस बुढ़ापे सा जिसकी आहट से थम जाती है साँसे अच्छे अच्छो की
जीवन के पड़ाव पे ठहरी गति शुन्य सवारी सा एक मोक्ष के इंतजार में तडपती आत्मा सा हु मैं
क्या कसूर मेरा ही है और परिणाम है ये मेरे ही कर्मो का जो खड़ा है आज मेरे ही सामने
या भोग रहा हूँ फल मैं पिछले जनम किसी जनम का जिसने आज छीन लिया है सब मेरा
और निराधार इस्तंब सा आज खड़ा वीरान सा मैं .....

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