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Friday, February 21, 2014

बदलाव

अक्सर जब लोगो सामाजिक नीतिओ और आज कल का सबसे प्रचलित राजनीती चाहे वो आम हो या खास ये प्रचलित शब्द क्यों प्रयोग किया मैंने अब समझ में आगया पर अपनी लम्बी लम्बी राय जताते देखता हूँ तो लगता ही नहीं की ये वही लोग जो कुछ समय पहले तक बीबी की साडी माँ की दवा बच्चो की फ़ीस और बेटी की शादी में इतना व्यस्त थे की अपनी राय जताने का भी समय नहीं निकल पाते थे आज क्या उन पिछली व्यस्ताओ से फुर्सत मिल गयी या ये समझ चुके है अब कुछ तो बदलना चाहिए या फिर ये फुर्सत पसंदों की वही भीड़ है जो हमेशा से अपने बहुमूल्य समय ऐसे ही नष्ट करते है देश के ऊपर चिंतन करके फिर भी शायद अब समय आ गया है की कुछ वक्त तो इस चर्चा पर दिया जाये लेकिन क्या सिर्फ चर्चा करने से सोशल मीडिया से शेयर करने कुछ बदलने वाला हैं या वाकई में वक्त आ गया है की कुछ तो नया होगा ……………………… कुछ तो बदले गा………
अभिषेक

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